संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी। सामाजिक न्याय और समान अवसर को लेकर देश में लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसी क्रम में समाजसेवी अमित राय ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश केवल आरक्षण आधारित सोच तक सीमित न रहे,बल्कि आर्थिक सहयोग आधारित शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि हर गरीब और जरूरतमंद परिवार को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं निःशुल्क चिकित्सा का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आज लाखों प्रतिभाशाली विद्यार्थी आर्थिक अभाव के कारण उच्च शिक्षा,तकनीकी शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा पूरी नहीं कर पाते। कई परिवार बच्चों की पढ़ाई और इलाज के लिए कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में युवाओं की प्रतिभा और मेहनत होने के बावजूद उनके सपने अधूरे रह जाते हैं,जो देश की मानव शक्ति के लिए चिंता का विषय है। अमित राय ने विशेष रूप से उन परिवारों की स्थिति पर चिंता जताई,जिनके घर के कमाने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु हो जाती है। ऐसे समय में बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है और महिलाओं के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और निःशुल्क बनाए,तो ऐसे परिवारों को नई ऊर्जा और सुरक्षा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला देश है। यदि युवाओं को समान अवसर,आधुनिक शिक्षा,तकनीकी प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा मिले तो भारत ज्ञान,अनुसंधान और मानव संसाधन के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने सरकार और नीति निर्माताओं से अपील की कि “समान अवसर,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,आर्थिक सहयोग और निःशुल्क चिकित्सा” को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बनाया जाए,तभी आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना साकार होगा।