अतुल राय की खास रिपोर्ट
वाराणसी। पंचक्रोशी यात्रा के तीसरे तीर्थ पड़ाव स्थल रामेश्वर में वरूणा नदी किनारे स्थित असंख्यातेश्वर महादेव मन्दिर में श्रद्धालुओं को आने-जाने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिये सेतु निर्माण,मन्दिर निर्माण,नंदी मूर्ति की स्थापना व अन्य कार्य पूर्ण होने पर गुरुवार को कलश यात्रा के साथ विधिवत पूजन अर्चन के बाद श्रद्धालुओं के लिए लोकार्पण किया गया।बताया जाता है कि सेतु का निर्माण आंध्र प्रदेश के रहने वाली सन्यासी चंद्रकला के मार्गदर्शन में निर्माणकर्ता अमेरिका के रहने वाली कुमारी नाग अन्नपूर्णा पद्ध्य व वैकेट रेड्डी के कर कमलों द्वारा तीन दिवसीय पूजन का कार्यक्रम शुरू हो गया है। पूजन के पहले दिन कलश यात्रा और शिखर पूजन दूसरे दिन महादेव का विघ्न (बेल) पूजन व तीसरे दिन भंडारा का कार्यक्रम होगा।इस मंदिर की मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी के निर्देश पर हनुमान जी के सानिध्य में असंख्य सेना वानरों के द्वारा उक्त शिवलिंग की स्थापना की गई थी। जिसकी वजह से यहां पर श्रद्धालुओं के आने जाने का तांता लगा रहता है।उक्त मंदिर वरुणा पुल से काफी नीचे होने के कारण श्रद्धालुओं को आने-जाने में दिक्कत होती थी। इसको देखते हुए उक्त सेतु का निर्माण के साथ आकर्षक ढंग से मंदिर का निर्माण कराया गया है। पंचकोशी मार्ग में पड़ने वाले 38 मंदिरों का अब तक जीर्णोद्धार कराया गया।इस मौके पर चंद्रकला ने कहा कि इसमें हमारा कुछ भी नहीं है सब महादेव की कृपा से हो रहा है। यह प्रेरणा मेरे मन में बहुत दिनों से हो रहा था कि पंचक्रोशी परिक्रमा क्षेत्र में पड़ने वाले जीर्ण शीर्ण मंदिरों का जीर्णोद्धार कराये। इस कार्य को कराने से मुझे असीम शांति प्राप्त हो रही है। मंदिर को जाने के लिए 20 फुट ऊंचा सेतु का निर्माण पिलर के साथ कराया गया। इसके साथ ही भव्य गेट मुख्य द्वार,भव्य महादेव मंदिर,रेलिंग,हैंडपंप के साथ अन्य कार्य कराया गया है।
रामेश्वर महादेव मन्दिर के पुजारी अनूप तिवारी ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार श्री रामचंद्र जी के निर्देश पर हनुमान जी के असंख्य सेना बंदरों के समूह द्वारा स्थापित किया गया है जो रामेश्वर महादेव मन्दिर का एक अंश है। इसी की वजह से इस शिवलिंग को असंख्यात शिवलिंगेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। पूजन कार्य नारायण गुरु के द्वारा विधिवत पूजन अर्चन के साथ कराया गया।