संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज
विनोद नाथ यती
वाराणसी के मण्डलीय अपील फोरम ने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया है बता दे की जिला कमेटी ने भी पूर्व में प्रमाण पत्र निरस्त किया था जिसके अपील में भी पुन: प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया गया बता दे की ब्रह्मदेव तिवारी जिन पर एससी-एसटी का मुकदमा प्रभुनाथ गोंड़ एवं उनके दोनों पुत्र नन्हकू गोंड़ एवं चंद्रेश गोंड़ ने लगवाया था जिस पर शिकायतकर्ता ने जिला फोरम में अपने अधिवक्ता योगेंद्र तिवारी एवं प्रिंस चौबे द्वारा आपत्ति दर्ज कराई कि मुकदमा करने वाले अनुसूचित जनजाति के नहीं है बल्कि पिछड़ी जाति के कहार है तमाम साक्ष्यो का अवलोकन करते हुए गोंड जनजाति का प्रमाण पत्र निरस्त किया गया अपीलकर्ता कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया जिससे वह माइग्रेट होकर वाराणसी जनपद में आया हो जनपद मिर्जापुर(अब सोनभद्र) जनपद मे निवासरत गोंड जनजाति से अपना संबंध अपीलकर्ता प्रमाणित करने में असफल रहे अधिवक्ता योगेंद्र तिवारी ने बताया कि जनपद में धड़ल्ले से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है वाराणसी क्षेत्र में भुर्जी, भडभुजा, कहार जो गोड़ टाइटल का प्रयोग करते हैं यह लोग पिछड़ी जाति के होते हैं तहसीलों में लेखपाल के मिली भगत से अनुसूचित जनजाति गोंड का प्रमाण पत्र बनवा लेते हैं जिससे मूल जनजाति का हक मारा जा रहा है वही इस मामले की जानकार अधिवक्ता प्रिंस चौबे ने बताया कि अनुसूचित जाति जनजाति इसलिए बनाया गया था ताकि यह लोग छुआछूत के शिकार थे जबकि कहार उच्च वर्ग के मांगलिक कार्यों में पानी पिलाने का काम एवं भडभुजा दाना भुनाने का काम करते रहे हैं यह लोग कभी भी छुआछूत के शिकार नहीं हुए वर्तमान समय में राजनीतिक दबाव से एवं राजनीतिक पार्टियों के वोट बैंक के चक्कर में मूल अनुसूचित जनजाति के लोगों का हक मारा जा रहा है पिछड़ी जाति के यह लोग जनजाति का प्रमाण पत्र बनाकर तमाम पदों पर आसीन है अगर जांच हुआ तो तमाम लोगों की कलई खुल जाएगी वाराणसी जनपद में बिना रोक-टोक के जमकर प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है मामला फंसने पर निरस्त भी किया जा रहा है मूल जनजाति कैमूर रेंज के जंगलों में निवास करती है वहां से जो लोग विस्थापित होकर आते हैं उन्हें विस्थापित प्रमाण पत्र देना होता है इन सभी चीजों को नजर अंदाज करके धड़ल्ले से प्रमाण पत्र जारी हो रहा है जनजातियों का अस्तित्व इसके कारण संकट में है क्योंकि मूल लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है वही अन्य सामान्य वर्ग एवं पिछड़ी जाति के लोग फर्जी एससी एसटी एक्ट के मुकदमा में पीड़ित हो रहे हैं |