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नागरिक समिति के प्रतिवेदन में शंकराचार्य को निशाना बनाने का आरोप

Updated on: 04 July, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी -- नागरिक समाज के अन्वेषण समिति में सीबीआई के पूर्व निदेशक एम. नागेश्वर राव ने 18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) को प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिर्मय शंकराचार्य जी की शोभायात्रा में बाधा से जुड़े घटनाक्रम पर अपने विस्तृत प्रतिवेदन में बताया है कि शंकराचार्य जी पारंपरिक पालकी शोभायात्रा के माध्यम से गंगा स्नान के लिए जा रहे थे। यह शोभा यात्रा पूर्व सूचना के साथ प्रशासन की जानकारी में और पुलिस सुरक्षा के बीच शांतिपूर्वक आगे बढ़ रही थी। इसके उपरांत भी संगम के निकट अंतिम चरण में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा इसे रोक दिया गया और शंकराचार्य जी को पालकी से उतरने के लिए बाध्य किया गया जिससे एक स्थापित और परंपरागत धार्मिक प्रक्रिया बाधित हुई।अधिकारियों ने इस कार्रवाई को संभावित भगदड़ की आशंका बताकर उचित ठहराने का प्रयास किया, किंतु वीडियो साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर समिति को ऐसी किसी स्थिति का तत्काल कोई संकेत नहीं मिला। समिति का निष्कर्ष है कि यह कारण घटना के बाद औचित्य सिद्ध करने हेतु प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि किसी अवैध जमाव या तात्कालिक खतरे के शोभायात्रा के साथ चल रहे श्रद्धालुओं पर बल प्रयोग किया गया। साथ ही वेद विद्यार्थियों के साथ भी दुर्व्यवहार भी किया गया और उनका शिखा पकड़कर घसीटा गया। समिति के अनुसार यह कार्रवाई केवल भीड़ नियंत्रण तक सीमित नहीं थी। बल्कि धार्मिक आचरण में जानबूझकर हस्तक्षेप थी जिससे ज्योर्तिमठ शंकराचार्य की संस्थागत गरिमा को ठेस पहुंची। श्री नागेश्वर ने कहा कि शंकराचार्य जी से उनकी वैधता सिद्ध करने के लिए नोटिस जारी किया गया। पाक्सो अधिनियम सहित अपराधिक कार्यवाहियां प्रारंभ की गई।। जिनमें गंभीर और संगतिया दिखाई देती हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत का राज्य द्वारा विरोध भी राजनीतिक स्तर की भूमिका को दर्शाता है।इस प्रतिवेदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिये गये सार्वजनिक वक्तव्यों का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि परिषद की स्वतंत्रता बनाए रखने और उसके राजनीतिकरण, नौकरशाहीकरण या अत्यधिक विधिक स्वरूप में बदलने से बचाने के लिए राजनेताओं वर्तमान या पूर्व सरकारी अधिकारियों और वर्तमान या पूर्व न्यायाधीशों को इसकी सदस्यता से बाहर रखा जाना चाहिए। यह परिषद राज्य में हिंदू धार्मिक मामलों का मार्गदर्शन करेगी जिसमें धार्मिक, शिक्षा, मंदिरों और मेलों का संचालन संबंधित संप्रदायों की परंपराओं के अनुसार सुरक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसी एकरूपता को थोकना नहीं बल्कि हिंदू परंपराओं की आंतरिक विविधता को सुरक्षित रखना है। ताकि प्रत्येक संप्रदाय अपनी परंपराओं के अनुसार कार्य कर सके। साथ ही यह व्यवस्था पारदर्शिता उत्तरदायित्व तथा सामाजिक समानता, सामाजिक और धार्मिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था का सम्मान सुनिश्चित करेगी। राज्य अपने लौकिक दायित्वों, कानून व्यवस्था, सुरक्षा और संरचना और नागरिक सुविधाओं का निर्वहन करता रहेगा। अंत में उन्होंने कहा कि काशी जो सनातन धर्म का प्रमुख आध्यात्मिक और सभ्यतागत केंद्र है- से इस प्रतिवेदन को जारी रखना इस विषय के व्यापक महत्व को रेखांकित करता है। जो केवल प्रयागराज की एक घटना तक सीमित नहीं बल्कि राज्य और हिंदू धार्मिक स्वतंत्रता के व्यापक संबंध से जुड़ा हुआ है। इस नागरिक समिति के प्रतिवेदन के अवसर पर उपस्थित मंचासीन अतिथियों द्वारा एक" ज्योतिर्मठ शंकराचार्य जी के विरुद्ध राज्य शक्ति का दुरूपयोग" नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

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