संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी ,आज दिनांक 17 अप्रैल। क्षत्रिय धर्म संसद काशी के तत्वावधान में आयोजित शौर्य कथा कार्यक्रम में कथावाचक पूज्य आचार्य शांतनु जी महाराज ने राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना एवं सामाजिक एकता के महत्व पर प्रभावशाली उद्बोधन दिया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में जन-जन के भीतर राष्ट्र के प्रति समर्पण और गौरव की भावना जागृत करना अत्यंत आवश्यक है।
आचार्य शांतनु जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि वनवास के समय उन्होंने राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग किया, किन्तु शास्त्रों और धर्म के मार्ग को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा और उन्नति के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन अनिवार्य है—जहाँ शस्त्र सुरक्षा का प्रतीक है, वहीं शास्त्र हमें सही दिशा और मूल्य प्रदान करते हैं।
उन्होंने समाज को संबोधित करते हुए हिंदू समाज की एकता पर विशेष बल दिया और कहा कि जब तक समाज संगठित रहेगा, तब तक राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त बना रहेगा। वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने तुष्टिकरण की नीतियों को राष्ट्र के लिए घातक बताते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों ने दीर्घकाल में देश को कमजोर किया है।
आचार्य जी ने ग्रामीण भारत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “भारत की आत्मा गांवों में बसती है।” उन्होंने गांवों के सशक्तिकरण, स्वावलंबन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने इतिहास, परंपराओं और संस्कारों से जुड़कर राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं और श्रोताओं ने आचार्य जी के विचारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। शौर्य कथा के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता का यह प्रयास समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश देने में सफल रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ संजय सिंह गौतम एवं धन्यवाद ज्ञापन रणविजय सिंह ने किया ।इस अवसर पर डॉ रमेश प्रताप सिंह ,अजीत सिंह बब्बू ,महेश्वर सिंह ,संजीव सिंह, प्रसिद्ध नारायण सिंह ,अरुण सिंह किरण सिंह नागेश सिंह, ठाकुर कुश प्रताप सिंह राजेश डा अतुल सिंह ,अंबिका सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।