अतुल राय की खास रिपोर्ट
*जाने -अनजाने हुए पापकर्म के शमन के लिए भगवान भाष्कर ,गायत्री माता की उपासना करते हुए किया तर्पण।
रामेश्वर*।श्रावणी उपाकर्म में यज्ञोपवीत पूजन और उपनयन संस्कार करने का विधान है। ओज व तेज की कामना के लिए श्रावण पूर्णिमा पर रक्षासूत्र बांधने, यज्ञोपवीत धारण करने, व्रत करने, नदी स्नान करने, दान करने, ऋषि पूजन करने, तर्पण करने और तप करने का महत्व रहता है।जाने -अनजाने हुए पापकर्म के लिए भगवान भाष्कर,माता गायत्री से
उपासना करते हुए तर्पण का विधान है। गुरुवार को क्षेत्र के जनेऊधारी ब्राह्मणों ने रामेश्वर स्थित वरुणा घाट पर स्नान कर विधिवत कर्मकांड सहित पूजन अर्चन किया।पंडित विजय नारायण त्रिपाठी के सानिध्य में ब्राह्मणों ने ऋषि और गुरु पूजन किया ।उन्होंने बताया हिन्दू का एक संस्कार है, चाहे वह किसी भी जाति या संप्रदाय का हो। यज्ञोपवीत सिर्फ ब्राह्मण ही नहीं बल्कि कई अन्य समाज के लोग भी धारण करते हैं। सभी को जनेऊ धारण करने का अधिकार है। आज के दिन उन्हें जनेऊ को स्नान कर नए जनेऊ का धारण मुख्य है। आचार्य प0 अनूप तिवारी,पं0 शशि प्रकाश त्रिपाठी,ललित तिवारी, नीरज पाठक,शिवम तिवारी,उदय नारायण,अवनीश विवेक, नितिन तिवारी सहित अन्य कई ब्राह्मण शामिल रहे।