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धीरेंद्र महिला पीजी कॉलेज की छात्रा मोनिका गुप्ता द्वारा प्रख्यात साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी का हुआ सजीव प्रसारण

Updated on: 04 July, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

 वाराणसी। जिला प्रशासन,asसंस्कृति उत्तर प्रदेश की प्रेरणा से प्रेमचंद मार्गदर्शन केन्द्र ट्रस्ट लमही द्वारा प्रतिदिन आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद आडियो प्रसारण के 1119 दिन पुरे होने पर कहानियों के सजीव प्रसारण का प्रेमचंद स्मारक लमही में मुंशी प्रेमचंद की कहानी नैराश्य का धीरेंद्र महिला पीजी कॉलेज की छात्र मोनिका गुप्ता द्वारा किया गया। कलाकार का सम्मान डा.संजय श्रीवास्तव ने किया।इस अवसर पर लेखिका व अध्यपिका डा.सारिका ज्योतिषी ने दीपेश को प्रेमचंद मित्र नामित किया। सारिका ने कहा मुंशी प्रेमचंद की रचना-दृष्टि विभिन्न साहित्य रूपों में प्रवृत्त हुई हैं। बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न मुंशी प्रेमचंद ने वर्षों पहले अपने साहित्य द्वारा नारी अस्मिता और मूल्यों के लिए जो संघर्ष किया था। वह आज नव जागरण के इतिहास में बहुत बड़ा योगदान है।यही कारण है,कि आज भी प्रेमचंद का 'स्त्री विमर्श' प्रासंगिक बना हुआ है। कार्यक्रम की भूमिका में ट्रस्ट के निदेशक राजीव गोंड ने कहा कि प्रेमचंद का कथा साहित्य भारतीय जनमानस की सामाजिक,सांस्कृतिक,आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं पर एक व्यापक दृष्टिकोण को प्रेमचंद जी अपनी कहानियों में समाज की मूक जनता के साथ-साथ नारी समस्याओं पर केवल चर्चा नहीं करते थे।अपितु नारी मुक्ति की भी बात करते थे। एक समय था कि जब भारतीय समाज में कन्या का जन्म को अभिशाप समझा जाता है। वही इस 'नैराश्य' कहानी में प्रेमचन्द ने इस यथार्थ का अंकन किया है। तदुपरान्त उसके पालन,पोषण व सुरक्षा की समस्या आती है।और फिर दहेज के कारण विवाह भी एक समस्या बन जाता है। प्रेमचंद 'नारी अस्मिता' के लिए नारियों को स्वयं जागृत होने की सलाह देते हैं। प्रेमचंद नारी जागरण की अलख जगाने के लिए घर-घर की नारियों का आह्वान करते हैं। जिसमें कोई सामाजिक विभेद नहीं दिखाई पड़ता। इस मौके पर अजय यादव,देव बाबू, प्रेम कुमार,राकेश कुमार,राहुल यादव,अरविंद कुमार समेत सैकड़ो छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।सभी आगंतुकों का स्वागत सुरेश चंद्र दूबे ने किया। कार्यक्रम संचालन मनोज विश्वकर्मा व धन्यवाद ज्ञापन राजेश श्रीवास्तव ने किया।

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