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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक गिरधर मालवीय नही रहे

Updated on: 04 July, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी/प्रयागराज। महामना मदन मोहन मालवीय के पौत्र और इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जस्टिस गिरधर मालवीय नहीं रहे। सोमवार सुबह प्रयागराज के जॉर्जटाउन स्थित एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया।वह 88 वर्ष के थे। जस्टिर गिरधर मालवीय का आवास भी जॉर्जटाउन में ही है। बीएचयू, वाराणसी के चांसलर रहे गिरधर मालवीय लोकसभा चुनाव-2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव भी थे। 

वह 14 मार्च 1988 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बने। नवंबर 2018 में वह बीएचयू, वाराणसी के चांसलर बने और गंगा महासभा के अध्यक्ष भी रहे। प्रयागराज स्थित सेवा समिति इंटर कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष पद का दायित्व भी उनके पास था।वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। अंतिम बार पिछले वर्ष बीएचयू में हुए दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। इसके बाद वह स्वास्थ्य कारणों से किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनके पुत्र पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी व पश्चिम बंगाल राज्य पुलिस के सलाहकार मनोज मालवीय अपने पिता के निधन के वक्त मौजूद थे। दो बेटियां शहर से बाहर हैं।

जस्टिस मालवीय के निधन की खबर सुनकर उनके आवास पर करीबियों की भीड़ इकट्ठा है। जस्टिस गिरधर मालवीय के करीबियों में शामिल बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी का कहना है कि जस्टिस मालवीय हमेशा मदन मोहन मालवीय के विचारों और सिद्धांतों पर चलने वाले व्यक्ति रहे। उनका जाना हम सभी के लिए अपूर्णनीय क्षति है। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि जस्टिस मालवीय का अंतिम संस्कार 19 नवंबर को रसूलाबाद घाट पर होगा।चार दिन पहले ही था उनका जन्मदिनगिरधर मालवीय का जन्म 14 नवंबर 1936 को वाराणसी में हुआ था। चार दिन पहले ही उनका जन्मदिन था। वह महामना मदन मोहन मालवीय के पौत्र गोविंद मालवीय के इकलौते पुत्र थे। उनकी शुरुआती शिक्षा वाराणसी के बेसेंट थियोसोफिकल स्कूल में हुई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में चिल्ड्रन्स स्कूल से कक्षा 10 की पढाई की। 1957 में गिरधर ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एक साथ विधि स्नातक और एमए राजनीतिशास्त्र में प्रवेश लिया।1960 में वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू किया। शुरुआती दौर में पिता के अस्वस्थ रहने के कारण गिरधर ने एक वर्ष दिल्ली में सरदार ज्ञानसिंह वोहरा के साथ तीस हजारी कोर्ट में और 1961 में पिता के निधन के बाद प्रयागराज आकर 1965 तक इलाहाबाद जिला कचहरी में पंडित विश्वनाथ पांडेय और सत्यनारायण मिश्र के साथ रहकर वकालत शुरू की इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस सुरेंद्र सिंह का कहना है कि जिस वक्त गिरधर मालवीय जी डिप्टी गवर्मेंट एडवोकेट थे तब वह ब्रीफ होल्डर हुआ करते थे। अलग-अलग तरह के कामों में उन्होंने बहुत मदद की। अच्छे से समझाया, बताया। जब मालवीयजी जज एलीवेट हो गए तो उन्होंने बहुत ही शानदार तरीके से भूमिका निभाई। बेहतरीन तरीके से काम किया। सेवानिवृत होने के बाद वह रिटायर्ड जज एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। मुझे भी सचिव बनाया। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके काम उनकी यादें हमेशा हमारे साथ जस्टिस गिरधर मालवीय को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके घर पर लोगों का तांता लगा हुआ है। महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र के साथ ही बड़ी संख्या में वकीलों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम, जिलाधिकारी और कमिश्नर ने भी पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त किया।

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जस्टिस गिरधर मालवीय के निधन पर संवेदना प्रकट की है। सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। केशव ने लिखा- 92 वर्ष की आयु में गिरिधर मालवीय जी ने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। गिरिधर मालवीय जी भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के पुत्र थे। वे समाज सेवा, शिक्षा और राष्ट्रभक्ति के प्रति पूरी तरह समर्पित थे। न्यायमूर्ति के रूप में उन्होंने न्याय के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी। मालवीय जी 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रस्तावक भी रहे। उनका पूरा जीवन विद्वता, राष्ट्रसेवा और समाज कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके निधन से देश ने एक ऐसा महान राष्ट्रभक्त और समाजसेवी खो दिया है, जो शिक्षा और सेवा के मूल्यों का प्रतीक थे। उनकी पुण्य आत्मा को शत-शत नमन और श्रद्धां

जस्टिस गिरधर मालवीय को श्रद्धांजलि देने के लिए बीएचयू के कुलपित प्रोफेसर सुधीर कुमार जैन उनके आवास पर पहुंचे। उन्हें उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

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