संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
रामनगर/वाराणसी।। शिया हज़रात के सबसे बड़े त्योहार ईद-ए-गदीर पर बुधवार रात्रि वारीगढ़ही स्थित अज़ाखानाए बाबुल हवाएज में एक महफिल सजाई गई और शायरों ने हजरत अली के मौला बनाए जाने पर अपने-अपने कलाम सुनाये। ईद-ए-गदीर में हज़रत अली के मौला बनाए जाने पर शिया हज़रात जश्न मना कर खुशी का इज़हार करते है। लगभग साढ़े १४०० साल पहले नबी ने हज से लौटते समय सवा लाख हाजियों के बीच गदीर के मैदान में हज़रत अली को अपना जानशीन बनाया। कहा जिस जिस का मैं मौला हूं, उस उस के अली मौला हैं। अली मेरे जानशीन हैं और अली मेरे भाई हैं। महफ़िल का आगाज़ मौलाना तहज़ीबुल हसन अज़मी ने तिलावते कलामे पाक से किया। महफ़िल में तक़रीर मौलाना हैदर मेंहदी ने की। महफ़िल में हिन्दुस्तान के मशहूर शायरों में शुमार ताज़ कानपुरी, मेयार जरवली, अज़ादार अज़मी, अमन इलाहाबादी, कुमैल अकबराबादी, बाक़र रज़ा रामनगरी, नज़ाक़त चंदौलवी, एलिया गाज़ीपुरी, समर चंदौलवी, युशा तुराबी, अता गदीरी आदि शायरों ने अपने कलाम सुनाकर खूब वाह वाही लूटी।। महफ़िल में मुख्यरूप से सय्यद रज़ी ज़ैदी, मौलाना फरमान रज़ा, मौलाना सय्यद वसीम असगर, इनाम रज़ा, मोहम्मद मेहंदी, मुन्ना मिर्ज़ा, यूसुफ़ रिज़वी रईस, समर अब्बास, मोहम्मद, सय्यद अख्तर रज़ा, मो० हैदर, आज़म रिज़वी, अम्बर तुराबी, नक़ी हसन (विक्की) एस हसन फ़ातमी (शुजा) मोहम्मद आसिफ,बाक़र रज़ा, मुजम्मिल मिर्जा, ज़हीर हसन ज़ैदी, कुमैल, अरमान, एबाद रज़ा, मोहम्मद मेंहदी सल्लन, असद मेंहदी सहित सैकड़ों लोग मौजुद थे। बानिए महफ़िल शमीम अख्तर गदीरी और अता गदीरी ने सबका शक्रिया अदा किया।। महफ़िल का संचालन हसन वास्ती ने किया।।