संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
अतुल राय
वाराणसी। सहकार से सामंजस्य ही पारिस्थितिकी तंत्र का मजबूत आधार स्तम्भ है।उक्त बातें डा0 शैलेन्द्र विक्रम सिंह राज्य शिक्षक सम्मान प्राप्त शिक्षक ने "विश्व गौरैया दिवस" के पूर्व अपने घर,कार्यस्थल विद्यालय पर गौरैया संरक्षण हेतु एक जिम्मेदार पहल कृत्रिम घोंसला,बर्ड फीडर एवं वाटर पॉट लगाने की शुरुआत कर हरहुआ ब्लाक के दादुपुर विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों,शिक्षक,शिक्षिकाओं,अभिभावकों एवं इको क्लब के सक्रिय सदस्यों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त की।उन्होंने कहा कि गौरैया न सिर्फ हमारे दादी,नानी की कहानियों तथा हमारे बचपन के सजीव मित्र थे बल्कि इनका सहचर हमें तमाम मानसिक विकारों,उच्च रक्तचाप आदि से निजात दिलाता है l इनका हमारे घरों में प्रवास हमारे घरों के वास्तुदोष,बुरी छाया एवं दैवीय आपदाओं के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का कार्य करता है।बहुमंजिली ईमारतों,फ्लाइओवर,सड़कों से असीमित पेड़ों की कटान ने इनके घोंसलों को छीना है l कंक्रीट के जंगल,चिमनियों से निकलने वाले जहरीले धुएँ,पेस्टीसाइड्स के अनियंत्रित छिड़काव तथा प्लास्टिक के बढ़ते प्रयोग से इनके प्रजनन क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है,जिससे आज इनके अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।डा0 सिंह ने गौरैया संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए एक जिम्मेदार जनपहल की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसकी शुरूवात प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं अपने घर,प्रतिष्ठान एवं अपने कार्यस्थल से करना होगा।यह किसी व्यक्ति, समाज या स्वयं सेवी संस्था की इकलौती जिम्मेदारी नहीं है और नहीं दिन विशेष की औपचारिकता मात्र।इसे एक ईमानदार जनपहल के रूप में स्वीकार करने का समाज से आह्वान किया है।अभियान में प्रमुख रूप से नीतू सिंह,रंजना यादव,अजय सिंह,मधु सिंह,निधि सिंह,अनूप कुमार,विभा सिंह,रोहन गुप्ता,अनुराग कुमार,विजय कुमार यादव सहित इको क्लब के सक्रिय सदस्यों सहित स्कूल के बच्चों ने प्रतिभाग किया।