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*काव्य का सृजन भी साधना से कम नहीं- डॉ. राजेश्वर आचार्य*    

Updated on: 03 July, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

 

वाराणसी काव्य का सृजन भी साधना से कम नहीं: डा. राजेश्वर आचार्य सुबह-ए-बनारस के नूतन प्रकल्प काव्यार्चन का प्रथम पुष्प मां गंगा को समर्पित नगर के वरिष्ठ एवं उदीयमान रचनाकारों ने काव्यपाठ से किया श्रोताओं को आनंदित वाराणसी। काव्य वह तत्व है जो निराशा के घनघोर अंधेरे से घिरे व्यक्ति के मन को भी उत्साह और आशा से भर सकता है। वहीं दूसरी तरफ काव्य का सृजन भी किसी साधना से कम नहीं है। ये बातें पद्मश्री डा. राजेश्वर आचार्य ने कहीं। वह मंगलवार को सुबह-ए-बनारस के नूतन प्रकल्प ‘काव्यार्चन’ के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

डा. आचार्य ने कहा कि सुबह-ए-बनारस ने सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस साहित्यिक प्रकल्प के माध्यम से वह वरिष्ठ रचनाकारों के संरक्षण एवं उदीयमान शब्दशिल्पियों के उन्नयन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेगा। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एलएनटी के महाप्रबंधक अशोक कुमार सिंह ने कहा कि आम लोगों में यह धारणा बनती जा रही है कि आज के दौर के कवि सिर्फ चुटकुलेबाजी ही करते हैं। काव्यार्चन का यह अभियान इस धारणा को तोड़ कर कविता के मूल सम्मान को समाज में पुन: स्थापित करने में सफल होगा। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री सरोज चूणामणि ने कहा कि काव्यार्चन का मासिक आयोजन काशी के साहित्यिक वातावरण में नवपरिवर्तन का सूत्रधार बनेगा। उद्घाटन सत्र के बाद पं. भोलानाथ त्रिपाठी ‘विह्वल’ की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन का प्रथम पुष्प मां गंगा को समर्पित किया गया। पं. भोलानाथ त्रिपाठी ‘विह्वल’ की कविता ‘अरे बात मेरी थोड़ी सी मान लीजिए, राष्ट्रहित में खुद को कुर्बान कीजिए’ ने राष्ट्र प्रेम की अलख जगाई। वरिष्ठ रचनाकार शमीम गाजीपुरी की गजल ‘जो दर्द मीठे हैं सबको मिला नहीं करते,इसीलिए तो हम इनकी दवा नहीं करते’ श्रोताओं को खूब पसंद आई। ओज के कवि अवधेश मिश्र ‘रजत’ ने अपनी कविता ‘हर बात का विरोध कैसा है ये प्रतिशोध,देश की फिजाओं में ज़हर घोलने लगे।’ से वर्तमान हालात पर कटाक्ष किया। संचालकीय काव्यपाठ में नागेश त्रिपाठी शांडिल्य ने ‘बात से बात बन जाए तो वो कविता है, बात दिल को जो छू जाए तो वो कविता है, बात बहुत बड़ी बात हो सागर की तरह फिर भी, बात गागर में समा जाए तो वो कविता है’ से कविता का मर्म श्रोताओं के सम्मुख रखा। इस अवसर पर आगत अतिथियों एवं रचनाकारों का स्वागत सुबह-ए-बनारस के सचिव डा. रत्नेश वर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से सुबह-ए-बनारस के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार मिश्र, श्याम केसरी, रुद्रानाथ त्रिपाठी पुंज, डा. प्रीतेश आचार्य उपस्थित रहे।

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