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*फर्जी कालसेन्टर के माध्यम से लोगो को नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले अन्तर्राज्यीय गैंग का सरगना सहित दो शातिर अपराधी गिरफ्तार भारी मात्रा मे मोबाइल, ए०टी०एम, पासबुक, चेकबुक, कम्प्यूटर व लैपटाप आदि बरामद*

Updated on: 03 July, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी- पीड़ित श्री श्रेयांस कुमार मिश्रा निवासी जौनपुर द्वारा साइबर क्राइम थाना वाराणसी में इस आशय से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया कि उनको आनलाइन वेबसाइट के माध्यम से नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 11 लाख की साइबर ठगी कर ली गयी है। जिसके सम्बन्ध में थाना साइबर क्राइम कमि० वाराणसी में मु० अ० सं० 20/2023 धारा 420 भादवि व 66डी आई0टी0 एक्ट पंजीकृत हुआ।उक्त प्रकरण के दृष्टिगत पुलिस आयुक्त कमि० वाराणसी श्री मुथा अशोक जैन व पुलिस उपायुक्त अपराध/साइबर अपराध श्री अमित कुमार तथा अपर पुलिस उपायुक्त अपराध/नोडल अधिकारी साइबर क्राइम श्री सरवणन टी. द्वारा उक्तू मुकदमे में प्रभावी कार्यवाही तथा निस्तारण हेतु निर्देशित किया गया। उपरोक्त मुकदमा की जांच व विवेचना में घटना में संलिप्त अभियुक्त रोहित कुमार पुत्र विजय कुमार निवासी सी0-738 संगम विहार थाना तिगरी जनपद दक्षिणी दिल्ली तथा अतीत कुमार पुत्र शिवप्रसाद निवासी एच0-200/65ए0 संगम बिहार थाना संगम विहार जनपद दक्षिणी दिल्ली का नाम प्रकाश में आया। जिसके उपरान्त प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम थाना श्री विजय नारायण मिश्र की अगुवाई में साइबर क्राइम थाना वाराणसी टीम द्वारा इलेक्ट्रानिक सर्विलांस व आधुनिक तकनीकी के माध्यम से दिल्ली प्रान्त के कालकाजी से फर्जी कालसेन्टर संचालक सहित 02 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया तथा उनके पास से भारी मात्रा में मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटाप, बैंक पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड, सिमकार्ड इत्यादि बरामद किया गया।अपराध करने का तरीका:-आनलाईन रोजगार की तलाश करने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रायः अपना रिज्यूम इत्यादि वेबसाइटों पर डाला जाता है, साइबर अपराधियों द्वारा अपने काल सेंटर को अवैध तरीके से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी दिखाकर तथा उसमें नौकरी कंसलटेंसी का कार्य दिखाते हुए उक्त कंपनियों को धोखे में रखकर आम रोजगार के तलाश में रिज्यम अपलोड किये हुए व्यक्तियों का डेटा प्राप्त कर लिया जाता है। साइबर अपराधियों द्वारा अपने काल सेंटर के टेलीकालर द्वारा इन व्यक्तियों को काल कर नौकरी से संबन्धित अपलोड रिज्यूम के संबन्ध में वार्ता कर उनको अपने झांसे में लेकर नौकरी देने हेतु फार्म भरवाकर रजिस्ट्रेशन कराया जाता है और इस तरह से संबन्धित व्यक्ति का संपूर्ण डेटा प्राप्त किया जाता है । इस प्रक्रिया के तहत साइबर अपराधियों द्वारा रजिस्ट्रेशन फीस, एप्वाइंटमेंट फीस, वेरीफिकेशन फीस, बीमा फीस इत्यादि का हवाला देते हुए लोगो से पैसों की लाखों रूपये की ठगी कर ली जाती है।पकड़े गये साइबर अपराधियों से गहन पूछताछ से पता चला कि ये लोग पूर्व में काल सेंटर में तथा विभिन्न नौकरी देने वाले कंपनियों में टेलीकालर के रूप में काम कर चुके है जहां से इन लोगों ने काम करने का तरीका सीखा है।

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