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*वनवासी बच्चों को स्कूल में दाखिल कर शिक्षा व संस्कार का ज्ञानार्जन कराकर ही उन्हें समाज के मुख्य धारा में शामिल किया जा सकता

Updated on: 03 July, 2026

अतुल राय की खास रिपोर्ट

 

वाराणसी। वनवासी बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़ें,नामांकन के बाद शत-प्रतिशत बच्चों का विद्यालय में ठहराव सुनिश्चित हो इसको लेकर आदर्श फाउंडेशन द्वारा बच्चों को भेजो स्कूल अभियान की शुरुवात चक्का गांव में किया गया।सचिव सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि समाज के मुख्य धारा में वनवासी बच्चों को जोड़कर शिक्षा व संस्कार दिया जाना जरूरी है।

चक्का ग्राम पंचायत अंतर्गत वनवासी कालोनी में वनवासी परिवार के सदस्यों के साथ बैठक कर शिक्षा के महत्व को समझाते हुए शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़ने की अपील करते हुए विगत दो सप्ताह से विद्यालय न जाने वाले विद्यार्थी स्वाति वनवासी, नंदनी वनवासी, गुंजा वनवासी, सोनम वनवासी,सुबास वनवासी और जितेंद्र वनवासी के अभिभावकों से आग्रह किया। बच्चों को नियमित विद्यालय भेजना सुनिश्चित करें।आदर्श फाउंडेशन के सचिव एस0के0 त्रिपाठी ने बताया की वनवासी कॉलोनियों में डोर टू डोर विजिट एवं पोषक क्षेत्र में स्थित विद्यालयों से संपर्क करने के दौरान वनवासी समुदाय के बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा से वंचित हैं। जो बच्चे नामांकित हैं वे नियमित विद्यालय भी नहीं जा रहे हैं।आदर्श फाउंडेशन वनवासी परिवार का दरवाजा खटखटाते हुए विद्यालय में नामांकन योग्य बच्चों को चिन्हित कर उनका विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करवायेगी एवं अनियमित विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों को स्कूल प्रबंधन समिति एवं ग्राम पंचायत के सहयोग से चिन्हित कर उनका शत प्रतिशत ठहराव भी सुनिश्चित करवाएगी।प्रधान मधुवन यादव ने समाज के हर जिम्मेदार नागरिक एवं जनता जनार्दन से अपील किया कि अभियान को सफल बनाने में हर संभव सहयोग करें।जनसंपर्क और डोर टू डोर अभियान के दौरान तीन ऐसे बच्चों को चिन्हित किया गया जो पहली क्लास में नामांकन योग्य हैं, बहुत जल्द इनका नामांकन पोषक क्षेत्र में स्थित विद्यालय में स्कूल प्रबंधन समिति, बच्चे के अभिभावक एवम पंचायत के प्रधान की उपस्थिति में कराएं। 

"बच्चों को भेजो स्कूल अभियान" को सफल बनाने में शीला देवी, प्रमिला देवी, सविता देवी, गुलाबी देवी,उर्मिला देवी,सावित्री देवी सहित दर्जनों वनवासी परिवारों का योगदान रहा। क्षेत्रीय प्रधानों व समाजसेवी ने अपने विचार व्यक्त कर वनवासी बच्चों को अपनाने की अपील की।

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