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मनुष्यों और देवताओं के मध्य सामंजस्य स्थापित करने का पर्व है देव दिपावली : शंकराचार्य

Updated on: 03 July, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

अतुल राय 

वाराणसी। केदार घाट स्थित श्री विद्या मठ में शुक्रवार को देव दीपावली के पावन अवसर पर सम्बोधित करते हुए परम धर्माशीष जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 ने कहा कि मनुष्यों एवं देवताओं के मध्य सामंजस्य स्थापित करने का पर्व है दीपावली। आज के दिन धरती पर सभी देवता पधारकर दीपार्चन स्वीकार करते हैं। उन देवताओं के साथ एकाकार होने का इससे सुंदर अवसर दूसरा नहीं हो सकता।आज आसमान पर जितने तारे दिखाई देंगे नीचे धरती पर उतने ही दीप दिखाई देंगे।आज जो लोग बहुत भाग्यशाली हैं वो काशी में उपस्थित हैं। हम समस्त लोगों को शुभकामनाएं देते हैं। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा व देव दीपावली के पावन अवसर पर श्री विद्या मठ में शंकराचार्य जी महाराज के सानिध्य में भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का मेवे से श्रृंगार और आंवले से अर्चन किया गया। सत्यनारायण भगवान की कथा हुई जिसमें यजमान की भूमिका में अभय शंकर तिवारी सपत्नीक उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि परम धर्माशीष शंकराचार्य जी दीपावली प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में मनाते हैं। इसलिए श्री विद्यामठ में आज के ही दिन संत,भक्त और वैदिक छात्रों ने मिलकर दीपावली मनाया। इसके उपरान्त पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज द्वारा आकाशदीप और दीपदान किया गया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से साध्वी पूर्णाम्बा दीदी,साध्वी शारदाम्बा दीदी,ब्रह्मचारी परमात्मानन्द,मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय,अनिल भारद्वाज,स्वामी नरेंद्रानंद,स्वामी भगवतानन्द,ब्रह्मचारी सर्वभूत हृदयानन्द,रवि त्रिवेदी,शैलेंद्र योगी,रमेश उपाध्याय,सुनील उपाध्याय,हजारी सौरभ शुक्ला,किशन जयसवाल,सक्षम सिंह योगी,मनीष पाण्डेय,सुनील शुक्ला सहित भारी संख्या में सन्तजन उपस्थित रहे।

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