पुर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़ संवाददाता आशुतोष मिश्रा
जौनपुर जनहित याचिका संख्या 798 सन 2025 में दिनांक 17.10.2025 को पारित आदेश में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि नाली खाते की भूमि पर चाहे जिस प्रकार का अतिक्रमण हो, उसे छह सप्ताह के भीतर हटाया जाए। आदेश समयबद्ध, स्पष्ट और बाध्यकारी था।याची अतुल कुमार दुबे ने आदेश की प्रति संलग्न कर जिलाधिकारी जौनपुर, उपजिलाधिकारी मड़ियाहूँ, अधिशासी अभियंता ग्रामीण जौनपुर तथा तहसीलदार मड़ियाहूँ को लिखित प्रार्थना पत्र देकर अनुपालन की मांग की। इतना ही नहीं, तहसील दिवस और थाना दिवस पर भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया लेकिन आरोप है कि जमीनी कार्रवाई के बजाय केवल कोरमा पूरा कर औपचारिक आख्या लगा दी गई, जबकि अतिक्रमण जस का तस बना रहा। दिए गए प्रार्थना पत्र कार्रवाई के बजाय केवल हल्का लेखपाल के बस्ता में धरे रहकर घूमते रहे और न्यायालय के आदेश का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया।
प्रशासनिक उदासीनता से विवश होकर याची ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अवमानना वाद दाखिल किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने जिलाधिकारी जौनपुर डॉ. दिनेश चन्द्र को अवमानना का नोटिस जारी किया है। साथ ही उपजिलाधिकारी मड़ियाहूँ नवीन कुमार एवं अधिशासी अभियंता नीरज कुमार को भी नोटिस जारी कर एक माह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय की इस सख्ती से स्पष्ट है कि आदेशों की अवहेलना और केवल कागजी कार्रवाई न्यायिक दृष्टि में स्वीकार्य नहीं है। अब सबकी निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं कि प्रशासन न्यायालय के समक्ष क्या जवाब देता है और नाली खाते की भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
यह प्रकरण न्यायालयीय आदेशों की गरिमा, प्रशासनिक जवाबदेही और जनहित की रक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनता जा रहा है।