सम्वाददाता पूर्वांचल एक्स्प्रेस न्यूज
वाराणसी। उत्तर प्रदेश सेवा निवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन की शाखा वाराणसी के तत्वावधान में शास्त्री घाट,वरुणा पुल कचहरी परिसर में पेंशनरों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर विशाल धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान पेंशनरों ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा और सरकार की विभेदकारी नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि पेंशनर और सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर मजबूरन इस उम्र में सड़क पर उतरने को विवश हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं के प्रति उदासीन बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा पिछले वर्ष वित्त विधेयक के माध्यम से पेंशनरों को अंशदायी और गैर-अंशदायी वर्गों में बांटकर पुराने पेंशनरों को आठवें वेतन आयोग के दायरे से बाहर करने की साजिश की जा रही है।पेंशनरों ने मांग की कि पूर्व वेतन आयोगों की भांति आठवें वेतन आयोग में भी सभी पुराने पेंशनरों को शामिल करने का स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी किया जाए। इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार महंगाई राहत (DR) समयानुसार बढ़ाने की भी मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में महंगाई तेजी से बढ़ रही है,लेकिन राहत बेहद सीमित दी जा रही है। धरने में यह भी मुद्दा उठाया गया कि पेंशन के राशिकरण (कम्यूटेशन) की कटौती 10 वर्ष बाद बंद की जाए,जबकि वर्तमान में सरकार 15 वर्षों तक कटौती जारी रख रही है,जो अन्यायपूर्ण है। इसके अलावा 80 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक 5 वर्ष पर 5 प्रतिशत पेंशन वृद्धि, कोरोना काल के दौरान रोके गए 18 माह के भत्तों का भुगतान, कैशलेस चिकित्सा सुविधा का विस्तार और पूर्व की तरह रेल किराए में छूट बहाल करने की मांग की गई। पेंशनरों ने यह भी कहा कि महंगाई राहत 50 प्रतिशत से अधिक होने पर उसे मूल पेंशन में जोड़कर पुनः गणना की जाए और पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल किया जाए। धरना को डॉ. श्रीकांत पाण्डेय,मदन मोहन श्रीवास्तव,सीताराम,राकेश दीक्षित,राधेश्याम पटेल,सोमरू पाण्डेय एवं डॉ. राम अवतार यादव सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीरेन्द्र सिंह ने की,जबकि संचालन अशोक सिंह द्वारा किया गया। प्रदर्शन के अंत में पेंशनरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया,तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।