संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
*वाराणसी।* तमिलनाडु के पलनी में अनादि फाउंडेशन द्वारा आयोजित गुरुकुल शिक्षा व इतिहास के कार्यक्रम में गुरु शिष्य परंपरा पर वाराणसी से पहुंचे महंत अवशेष पांडेय उर्फ कल्लू महाराज ने कहां कि काशी प्राचीन काल से ही शिक्षा व कला की राजधानी रही है। और प्राचीन भारत में सिर्फ़ गुरुकुल परंपरा ही शिक्षा का माध्यम हुआ करता था गुरुकुल शिक्षा के ही बल पर हमारा भारत विश्व गुरु बना गुरु का अर्थ होता है अंधकार से प्रकाश की और ले जाना। कल्लू महाराज ने ये भी कहा की गुरु वित्त हरण करने वाला नहीं बल्कि चित्त हरण करने वाला होना चाहिए जो अपने शिष्य के चित्त को हरण कर उनको भगवद् की प्राप्ति के मार्ग पर ले जाये शिष्य आत्मा होता है गुरु महात्मा और जब आत्मा महात्मा से मिलता है तो ही परमात्मा की प्राप्ति होती है। गुरुकुल का अर्थ होता है गुरु का परिवार जहां गुरु अपने शिष्य को शास्त्र ज्ञान विज्ञान के साथ आत्म निर्भर भी बनाता है और गुरुकुल शिक्षा अपने शिष्य को राष्ट्र भावना भी सिखाता है। गुरुकुल परंपरा भारत की प्राचीन परंपरा है और इसी परंपरा के मार्ग पर चल कर भारत विश्व गुरु बना हुआ है। आज हम इस आधुनिक काल में भी इस परंपरा का पालन कर रहे है।अगर हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर रहे है कल्लू महाराज ने ये भी बोला की हमें गुरु की तलाश नहीं करनी है बल्कि स्वयं को गुरु बनाना है और गुरुकुल का निर्माण करना है। गुरुकुल शिक्षा रामायण काल महाभारत काल से चली आ रही है भगवान राम अपने तीन भाई के साथ गुरु वशिष्ठ के अश्रम में रह कर वडी शास्त्र शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की तो पांडव ने गुरु ड्रोन से गुरुकुल की शिक्षा प्राप्त की और भगवान श्री कृष्ण ने भी अपने भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ अवंतिका नगरी के सादीपनी गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की है। कल्लू महाराज ने ये भी बताया की किसी भी देश का पराजय तब होता है कब वो संस्कृति को खो देता है और जहां संस्कृति को बचाने वाले लोग है वो देश कभी पराजय नहीं हो सकता।