सम्वाददाता पूर्वांचल एक्स्प्रेस न्यूज
वाराणसी 23 दिसंबर मणिकर्णिका तीर्थ है महाश्मशान नहीं किसी भी वेद पुराण में मणिकर्णिका शमशान नहीं दिखाया गया है मणिकर्णिका मोक्ष का द्वार है यहां श्री विष्णु चरण पादुका है जबकि जलासेन घाट महा श्मशान है महाश्मशान के बाद काशी में किसी को मोक्ष मिलता है तो मणिकार्णिका तीर्थ से इसकी पवित्रता इस बात से जान सकते है कि पच कोशी यात्रा यहां से ही शुरू होता है अन्य कई अन्य धार्मिक आयोजन की यह जन्म स्थली है भगवान विष्णु ही मोक्ष के देवता है। इसलिए इसे काशी के महा तीर्थ के रूप में मान्यता है पौष मास के तृतीया पर यहां पूजन का विशेष महत्व है इसी के चलते आज श्री काशी तीर्थ पुरोहित सभा के अंतर्गत श्री विष्णु चरण पादुका मणिकर्णिका सेवा समिति ने दर्शन पूजन के साथ ही काशी अनुनाद कार्यक्रम का आयोजन समिति के संस्थापक पंडित देवेंद्र नाथ शुक्ल ने अध्यक्ष पंडित मनीष नंदन मिश्र पंडित विवेक शुक्ला के संयोजन में किया। पूजन के बाद काशी अनुनाद कार्यक्रम बजड़े पर रंगा रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें भजन के साथ ही चैती ठुमरी दादरा और कजरी का गायन हुआ सभी लोग भाव विभोर होकर रंगा रंग कार्यक्रम में भाव विभोर हो गए मां गंगा के गोद में बजड़े पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे नगर प्रमुख नगर के विभिन्न नामचीन संस्थाओं की तरफ से भारी संख्या में शामिल लोगों ने काशी अनुनाद कार्यक्रम को शानदार बनाने में अहम भूमिका निभाई कार्यक्रम में पूजन पंडित मनीष नंदन मिश्र व पंडित विवेक शुक्ल के नेतृत्व में हुआ कार्यक्रम में मुख्य रूप से अरविंद मिश्रा देवेन्द्र नाथ शुक्ल कन्हैया त्रिपाठी आनंद कृष्ण शर्मा मनीष नंदन मिश्र विवेक शुक्ल श्रीकांत पांडे सुनील शुक्ल कान्हा पांडे ब्रजेश पाठक तनुश्री रॉय दिलीप सिंह आदि लोग शामिल रहे।