अतुल राय की खास रिपोर्ट
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*वाराणसी।*सुदामा पांडेय धूमिल की कविता में भारतीय लोकतंत्र के अंतरविरोधों की गहरी आलोचना के साथ ही उनके यहां पक्ष और विपक्ष पूरी तरह स्पष्ट है। विपक्ष अगर संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था है तो पक्ष भारतीय जनता है। खेवली में जन्म लेने वाले महाकवि धूमिल के पुण्य तिथि पर आज जन कवि धूमिल पुस्तकालय एवं वाचनालय पर गोष्ठी का आयोजन कर उनके जीवनी के बारे में लोगों को चर्चा के माध्यम से अवगत कराया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पर्यावरण प्रेमी मनीष पटेल उनके चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।उन्होंने कहा कि 1946 में आजादी के पूर्व ही प्रगतिशील कवि केदारनाथ अग्रवाल ने तत्कालीन नेतृत्व वर्ग की कठोर आलोचना अपनी ‘हमको न मारो नज़रिया’ जैसी काव्य-पंक्तियों के माध्यम से की।कार्यक्रम में शामिल जनों ने धूमिल की पुण्य तिथि पर पौधरोपण कर संरक्षण का संकल्प लिया।कार्यक्रम में भुलई राम पटेल,बृजेश कुमार,पुष्पा देवी,अमन कुमार,रणजीत चौथरी,मंजन कुमार,लौटन पटेल सहित कई ज़माजसेवी शामिल रहे।