संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
*हरहुआ,वाराणसी।* माँ गंगा उनकी सहायक नदियों की अविरलता और निर्मलता के लिए दूने उत्साह के साथ काम करने की प्रेरणा 'गंगा सप्तमी' का यह पर्व प्रदान करता है। आज ही के दिन मांँ गंगा भगवान विष्णु के कमंडल से चलकर भगवान शिव की जटाओं तक पहुंची थीं। महाराजा सगर के पुत्रों को तारने के लिए चार पीढ़ियों की तपस्या के बाद भगीरथ की तपस्या का परिणाम आज ही प्राप्त हुआ था।गंंगा सप्तमी के दिन मांँ गंगा के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं। स्नान और पूजन तथा आरती का विशेष महत्व है। उक्त बातें आज 'मारकण्डेय महादेव धाम,कैथी' में आयोजित गोष्ठी में गंगा समग्र काशी विभाग के संयोजक दिवाकर द्विवेदी ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बतायीं।उन्होंने उपस्थित जन का आवाहन किया कि सभी को एकजुट होकर सामाजिक क्षेत्र में आगे बढ़कर नदी तालाब और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण और सफाई की आवश्यकता समझाएं और गंगा समग्र के कार्यों को आयाम के अनुसार आगे बढ़ाने का कार्य करें। जल के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा,यदि जल संरक्षण की दिशा में समाज जागृत होकर आगे नहीं बढ़ेगा, तो आने वाला समय कठिन होगा।
उपस्थित कार्यकर्ताओं द्वारा सर्वप्रथम मार्कंडेय महादेव स्थित गंगा घाट की सफाई का कार्य किया गया। तदुपरांत सभी ने मांँ गंगा का पूजन अर्चन और आरती किया। मांँ गंगा के चित्र पर माल्यार्पण और संगोष्ठी का आयोजन किया गया।संगोष्ठी की अध्यक्षता श्रीयुत श्रीपत सिंह और संचालन जिला संयोजक चंद्रप्रकाश दुबे द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रुप से जिला संरक्षक रणदीप सिंह संपर्क आयाम प्रमुख शशि प्रकाश मिश्रा खंड संयोजक हरहुआ जयप्रकाश दुबे,सहसंयोजक भगत यादव,राजनारायण पटेल (प्रधान प्रतिनिध) खंड संयोजक आराजी लाइन्स महेंद्र प्रसाद यादव खंड संयोजक बड़ागांव मनोज कुमार पांडेय,सह संयोजक मनोज कुमार सिंह श्याम धर मिश्रा,अशोक तिवारी,दीपक चौहान (प्रधान) अनौरा,अजीत मिश्रा,बुलबुल पांण्डेय सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।