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*मकर संक्रांति पर्व की महत्ता

Updated on: 04 July, 2026

अतुल राय की खास रिपोर्ट

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*मकर संक्रांति पर्व जीवन में नई ऊर्जा प्रदान करती है।**रामेश्वर,वाराणसी।* मकर संक्रांति पर्व पर सूर्य की रश्मियों व उनकी शक्तियों पर पूर्व डीडीओ डॉ0 डी0 आर0 विश्वकर्मा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-शायद हम सभी यह नहीं जानते कि सूर्य की रश्मियों में छह शक्तियां विद्यमान होती है।

1- दहनी जलाने की शक्ति।2- पचनी पाचन क्रिया कराने की शक्ति ।3 - ध्रुमा सूर्य की रश्मियों में लोहित करने की शक्ति।4- कार्षिणी आकर्षित करने की शक्ति भी रवि रश्मियों में होती है ।5- वर्षिणी सूर्य की किरणों में वर्षा कराने की शक्ति ।6- रसा की शक्ति

वनस्पतियों,फूल फलों मेंरस उत्पन्न करने की शक्ति।जिससे यह संसार शोभायमान है,अन्यथा पूरे ब्रह्मांडमें अंधकार की कालिमा व्याप्तहोती,सूर्य जीव जगत हेतु कितनामहत्वपूर्ण है।इसी लिए मनीषियों ने सूर्य को विश्व की आत्मा कह कर उसे पुकारते है।वैसे तोमकर संक्रांति का पर्व सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना को आध्यात्मिक भावना एवं साधनासे लोक को जोड़ता है। विश्व कीआत्मा सूर्यदेव,अब क्रमशः उत्तरायण की ओर गमन करते है,फलस्वरूप दिन बड़े होने केकारण हम सभी को प्रकाश ज्यादा नसीब होने लगता है।सर्दियों से सभी को राहत मिलनाशुरू हो जाता है,जिससे तमामविमारियों से मुक्ति मिलना प्रारंभहो जाता है।प्रकाश ज्यादा होनेके कारण अंधकार का ज्यादाअस्तित्व नहीं रहता।सभी जीवजंतुओं पेड़ पौधों में शक्ति काएक अप्रतिम संचार शुरू हो जाताहै,वसंत भी आने को उत्सुक होनेलगता है,चारों तरफ एक अजीबतरह की ऊर्जा व्याप्त होना प्रारंभहो जाती है,वातावरण मनोनुकूलहोने से सर्वत्र प्रसन्नता का भावदिखाई देने शुरू हो जाते है,प्रकृति अमृत प्राण होने लगतीहै,फसले पक कर तैयार हो जातीहैं,अन्नदाता किसानों के चेहरे पर प्रसन्नता दिखने लगती है,यही कारण है कि हम प्रकृति का एहसान हेतु उत्सव का आयोजन करना प्रारंभ करते है।मकर संक्रांति का इस कारण भी सबसे ज्यादा महत्त्व,हम सभी के लिए।जीव जंतुओं व सभी वनस्पतियोंमें चेतनात्मक स्पंदन भी होने लगता है,इसी कारण सूर्य का आध्यात्मिक,पारलौकिक महत्वहमारी साधना में भी है। सूर्य उपासना से पवित्रता,प्रखरता,तेजस,वर्चस इत्यादि प्राप्त होतीहै,इसी कारण तत्वदर्शियों ने सूर्यउपासना से लोक लोकांतर के रहस्य को उद्घाटित किया है।कहते है कि जब रावण पर विजयनही मिल पा रही थी तो भगवान राम ने सूर्य उपासना की थी,तबवह विजयी हुए,वैसे भी सूर्य से हीपौधे क्लोरोफिल का निर्माण करते है और वृद्धि को प्राप्त करतेहै,सारा विश्व ही सूर्य से ही ऊर्जा प्राप्त करता है,इसी लिए सूर्य काइतना महत्त्व हमारे जीव जगत मेंहै।इसीलिए यह पर्व मनाया जाता है।आप सोच सकते है कि कितनीगहरी सोच हमारे ऋषियों,महर्षियों,पूर्वजों की थी।मकर संक्रांति,का भौगोलिक महत्त्व सूर्य का दक्षिणी गोलार्धसे उत्तरी गोलार्ध में गमन।सामाजिक महत्व,फसलों केपकने पर कृषकों के चेहरों पर

प्रसन्नता।फसलों के उत्पादन से अर्थ का आगमन।मकरस्त सूर्य से आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति।सभी जीव जंतुओं,वनस्पतियों में एक विशेष स्पंदन की शुरुआत होती है। जीवन मे नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। हम सबको आज के दिन से प्रकृति से सीख लेनी चाहिए।

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