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बाबू चंद्रमा सिंह महान शिक्षाविद,संवेदनशील साहित्यकार बन समाज को नई दिशा प्रदान की

03 July, 2026  |  06:01 PM
बाबू चंद्रमा सिंह महान शिक्षाविद,संवेदनशील साहित्यकार बन समाज को नई दिशा प्रदान की

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

अतुल राय 

 

वाराणसी। राजेश्वरी महिला महाविद्यालय हरहुआ, वाराणसी में साहित्यकार चंद्रमा सिंह की 91वी जयंती पर साहित्यकार डॉ० राघवेन्द्र नारायण सिंह द्वारा सम्पादित चन्द्रमा सिंह रचनावली, खण्ड-एक का विमोचन एवं विभूति सम्मान अलंकरण समारोह महाविद्यालय के 'चन्द्रमा सिंह स्मृति सभागार' में सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने माँ सरस्वती एवं स्व0चन्द्रमा सिंह के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।कार्यक्रम संयोजक डॉ० राघवेन्द्र के स्वागत वक्तव्य के पश्चात प्रख्यात इतिहासवेत्ता डॉ० राघव शरण एर्मा ने अपने उ‌द्घाटन वक्तव्य में साहित्य को किसी भी राष्ट्र की अनमोल धरोहर बताया। उन्होंने साहित्य के जनपक्ष पर बल देते हुए कहा कि साहित्य ही समाज को रोशनी देता है। वेद,उपनिषद्, रामायण,महाभारत उत्कृष्ट साहित्य ही हैं जो युगों से सामाजिक चेतना को जागृत किये हैं। विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ० प्रकाश उदय ने चन्द्रमा सिंह के साहित्य को जमीन से जुड़ा हुआ जनता का साहित्य बतलाते हुए उन्हें जनकवि की संज्ञा दी। मुख्य वक्ता डॉ० इंदीवर ने चन्द्रमा सिंह के साथ अपने संस्मरणों को साझा करते हुए उन्हें महान शिक्षाविद और संवेदनशील साहित्यकार बतलाया तथा उनके साहित्य के जनवादी तेवर पर विस्तृत चर्चा की।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ० सविता चड्ढा ने चन्द्रमा सिंह रचनावली,खण्ड-एक के प्रकाशन के लिए डॉ० राघवेन्द्र नारायण सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस रचनावली के प्रकाशन से चन्द्रमा सिंह के साहित्य को पुनर्जीवन प्राप्त हुआ है और उनके विचार नई रोशनी में लोगों तक पहुँच रहे हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ० हरेराम पाठक ने चन्द्रमा सिंह के साहित्य पर गहन शोध करने की जरूरत पर बल दिया क्योंकि उनके साहित्य के साथ न्याय तभी होगा जब उनके समग्र साहित्य को समीक्षा की कसौटी पर कसा जाये और उसके सामाजिक सरोकार को उद्घाटित किया जाए।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ० रामसुधार सिंह ने चन्द्रमा सिंह के साहित्य को आम आदमी का साहित्य बतलाया और उसमें समाज की पीड़ा तथा व्यवस्था की खामियों से उपजे असन्तोष को रेखांकित करते हुए उसे काल की सीमा का अतिक्रमण करते हुए सार्वभौमिकता से लबरेज कहा। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों से पधारे साहित्यकारों ने चन्द्रमा सिंह की स्मृति में काव्य-पाठ किया। काव्यपाठ करने वाले विशिष्ट कवियों में राही राज,उषा कनक पाठक,मधुलिका राय ने अपनी कविताओं से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस अवसर पर विभिन्न साहित्यकारों को चन्द्रमा सिंह स्मृति सम्मान से अलंकृत किया गया। अलंकृत साहित्यकारों में डॉ० राघव शरण शर्मा,डॉ० सविता चड्ढा,डॉ० हरेराम पाठक,डॉ० इंदीवर,डॉ० प्रकाश उदय,डॉ० उमेश प्रसाद सिंह,डॉ० रामसुधार सिंह,डॉ० उषा कनक पाठक,डॉ० रीमा सिन्हा,डॉ० उपेन्द्र विनाक सहस्त्रबुद्धे और अन्य विभूतियाँ रहीं जिन्हें पुष्प गुच्छ,प्रशस्ति-पत्र,स्मृति-चिह्न,मेडल और अंगवस्त्रम से अलंकृत करते उनके साहित्यिक अवदान को राजेश्वरी एजुकेशनल ट्रस्ट एवं चैरिटेबुल ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ० राघवेन्द्र नारायण सिंह द्वारा प्रशंसित किया गया। कार्यक्रम के अन्त में डॉ० राघवेन्द्र नारायण सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कौशलेन्द्र नारायण सिंह,विजयेन्द्र नारायण सिंह,सौन्दर्य नारायण सिंह,नृपेन्द्र नारायण सिंह,अंशुमान सिंह एवं डॉ० धीरेन्द्र कुमार तिवारी उपस्थित रहे।

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