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दक्षिण एशिया में चावल की सीधी बुवाई की तकनीक को बढ़ावा देने के लिए योजना कार्यशालाओं और बैठकों का आईसार्क में किया गया आयोजन

03 July, 2026  |  02:12 PM
दक्षिण एशिया में चावल की सीधी बुवाई की तकनीक को बढ़ावा देने के लिए योजना कार्यशालाओं और बैठकों का आईसार्क में किया गया आयोजन

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

अतुल राय 

 

वाराणसी। इर्री दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईएसएआरसी) ने प्लांटडायरेक्ट प्रोजेक्ट (भारत के सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों के लिए ड्राई डायरेक्ट सीडेड (डीडीएस) चावल पर एक परियोजना) की पहली वार्षिक समीक्षा बैठक की मेजबानी की।यह परियोजना बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से इर्री के माध्यम से संचालित की जा रही है।इस दो दिवसीय कार्यक्रम में बीएमजीएफ के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गैरी एटलिन,सेंटर फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (सीआरडी) के अध्यक्ष डॉ. बी.एन. सिंह, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.आर. कम्बोज,भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि और आईआरआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रतिनिधि शामिल थे।बैठक में परियोजना के तहत प्राथमिकताओं और गतिविधियों,पिछले वर्ष की प्रगति और प्रमुख उपलब्धियों पर तकनीकी चर्चा,परियोजना के तहत प्रजनन किस्मों के विकास आदि पर आगामी वर्ष के लिए कार्य योजना,इर्री- राष्ट्रीय कृषि एवं अनुसंधान शिक्षा प्रणाली के बीच डीडीएस प्रजनन के लिए समर्पित नेटवर्क, डीडीएस विशिष्ट प्रजनन पूल में विशेषता अंतराल की पहचान और समाधान करना,आदि विषयों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में बोलते हुए,डॉ. गैरी एटलिन ने चावल-गेहूं फसल प्रणालियों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और नवाचारों और अनुसंधान के माध्यम से छोटे भूमिधारकों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्लांटडायरेक्ट परियोजना के अंतर्गत उन्होंने वैज्ञानिकों को मिट्टी की संतृप्ति,कार्बन उत्सर्जन और स्थिर और टिकाऊ उपज को बनाए रखते हुए कम अवधि की चावल की किस्मों पर शोध निष्कर्ष विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही,उन्होंने आईसार्क में स्थापित स्पीड ब्रीडिंग सुविधा की भी सराहना की जो चावल की किस्मों के तेजी से विकास को सक्षम बनाती है जिससे अनुसंधान प्रक्रियाओं को तेजी मिलने में सहायता हो सकती है।इर्री राइस ब्रीडिंग इनोवेशन प्लेटफॉर्म के अनुसंधान निदेशक डॉ. हंस भारद्वाज ने डॉ. एटलिन की टिप्पणियों का समर्थन किया और प्लांटडायरेक्ट को एक ऐसी परियोजना के रूप में संकल्पित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया,जो निश्चित रूप से किसानों को फसल-स्थापना विधियों के लिए लाभान्वित करेगी और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली चुनौतियों से निपटने में किसानों के सहायक होगी।आईसार्क के निदेशक डॉ सुधांशु सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा,“मैं आप में से प्रत्येक का स्वागत करता हूं जो अनुसंधान और विकास के माध्यम से जलवायु-लचीला कृषि-खाद्य प्रणालियों को विकसित करने की इस उपयोगी चर्चा के लिए यहां उपस्थित हैं।पिछले वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत टिप्पणियों में अपनी सहमति व्यक्त करते हुए मैं कृषि प्रणाली में उत्पादकता को बढ़ाने के लिए डीडीएस सिस्टम में प्रबंधन और प्रजनन लक्ष्यों की पहचान के मजबूत एकीकरण पर भी जोर देना चाहूंगा। हमारे पास कार्बन क्रेडिट बाजारों के क्षेत्र में प्रवेश करने का एक बड़ा अवसर है जो हमारे किसानों की आर्थिक स्थिरता को बढ़ा सकता है।''सीधी बुआई वाले चावल से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति और उपलब्धियों पर चर्चा करने के लिए आईसार्क में कई अन्य योजना और समीक्षा बैठकें भी आयोजित की गई।जेंडर इंटेंशनल ड्राई- डीएसआर उत्पाद प्रोफाइल हितधारक कार्यशाला में आनुवंशिक,कृषि विज्ञान और सामाजिक प्रासंगिकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए दोनों क्षेत्रों के लिए वर्तमान बाजार विभाजन और लक्ष्य उत्पाद प्रोफाइल (टीपीपी) पर चर्चा की जाएगी।स्केलडायरेक्ट परियोजना के तहत उद्देश्यों और कार्य पैकेजों को पूरा करने के लिए अब तक की गई प्रगति,अपनाए गए दृष्टिकोण और भविष्य की कार्रवाइयों को प्रतिबिंबित करने और चर्चा करने के लिए स्केल डायरेक्ट वार्षिक योजना और प्रतिबिंब बैठक। स्केलडायरेक्ट छह देशों अर्थात् भारत,बांग्लादेश,नेपाल,केन्या,तंजानिया और मोज़ाम्बिक में डीएसआर पहल को बढ़ाने के लिए यूएसएआईडी और बायर के सहयोग से आईआरआरआई द्वारा शुरू की गई एक परियोजना है।

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