पंजीकृतUDYAM-UP-75-0003230 | वाराणसी
Purvanchal Express News
संपर्क करें:
purvanchalexpressn@gmail.com
UDYAM-UP-75-0003230

रामचरितमानस किताब नहीं बल्कि भगवान राम का स्वरूप :राजन जी महाराज

03 July, 2026  |  12:33 PM
रामचरितमानस किताब नहीं बल्कि भगवान राम का स्वरूप :राजन जी महाराज

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी।चोलापुर क्षेत्र महावीर बाजार के D.K उपवन में नव दिवसीय रामकथा के प्रथम दिन प्रेम मूर्ति पूजा संत श्री प्रेमभूषण जी महाराज की कृपा पात्र पूज्य राजन जी महाराज जीने अपने मुख से कहा कि ईश्वर युग है सनातनियों का अयोध्या में 22 तारीख को प्राण प्रतिष्ठा हुआ है कलयुग में इसलिए ईश्वर युग है सनातनियों के लिए उन्होंने कहा कि रामचरितमानस किताब नहीं बल्कि भगवान राम का स्वरूप है और मानस को मानस में उतारिए मनुष्य की जीवन बन जाएगा उन्होंने कहा कि काशी में शिव विराजमान है काशी में ज्ञानी भवानी विराजमान है काशी में जितने जीव जंतु हैं काशी में मृत्यु होता है तो उसको मुक्ति मिलती है भगवान राम का देन है राजन महाराज ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा हुआ है कितने भाग्यशाली हैं हम लोग त्रेता युग में 14 वर्ष का वनवास झेलना पड़ा भगवान राम को अब संकल्प लीजिए।अब कभी भी हमारे प्रभु श्री राम जी को वनवास ना हो।पंडाल में श्रोता तालिया,हर हर महादेव और जय जय सियाराम के नारे से पूरा पंडाल गूंज उठा। महाराज जी ने बताया कि संतों का कौन है संतों का सिर्फ सेवक भगवान राम का सेवक शंकर जी थे भगवान राम का दिन रात राम-राम बजाते थे भगवान शंकर राम जी के स्वामी हैं भगवान की शखा है जो काशी में राम कथा है।वह अयोध्या मंदिर को समर्पित है कथा के शुभारंभ में दीप प्रचलित हुआ ढोल नगाड़े से स्वागत कर राजन जी महाराज से आशीर्वाद लिए जिसमें श्रवण मिश्रा उर्फ मिंटू ,अर्चना मिश्रा,प्रेम यादव,प्रियंका यादव,सुशील मिश्रा,सुनीता मिश्रा,अनिल मिश्रा महाराज जी से आशिर्वाद प्राप्त किए।

© 2026 Purvanchal Express News. All Rights Reserved. (UDYAM-UP-75-0003230)