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*विश्व धर्म जागरण का आध्यात्मिक अनुष्ठान एक सौ ग्यारह हवन कुंड में बुराई ,अहंकार का स्वाहा के साथ हुआ सम्पन्न।*

03 July, 2026  |  09:06 AM
*विश्व धर्म जागरण का आध्यात्मिक अनुष्ठान एक सौ ग्यारह हवन कुंड में बुराई ,अहंकार का स्वाहा के साथ हुआ सम्पन्न।*

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

*हरहुआ।* सर्व आत्माओं की परम आत्मा 'परमात्मा' ज्योतियों की परम ज्योति है। जो प्रकृति अज्ञान अंधकार से परे बोधस्वरूप हैं जो सबके हृदय में विराजमान ज्ञानके परम लक्ष्य हैं जिनसे बढ़कर दूसरा जानने योग्य नही। 'स्वबोध कुम्भ' अपने ही हृदयवसी आत्मप्रभु को जानने-जीने उन्हें अपना बना लेने के लिए सक्रिय 'विश्वधर्म प्रवर्तन' का अमृत सन्देश है।यह धर्म-परिषद 'जीवन सत्य' के प्रत्येक जिज्ञासु के लिए अमृत का कुम्भ लेकर धर्म के सनातन सत्य को जानने का महाकुंभ है।

   उक्त बातें कोइराजपुर हरहुआ में आयोजित 11 दिवसीय स्थितप्रज्ञ भगवान नागा बाबा के 51वे परिनिर्वाण पर्व पर चतुर्थ स्वबोध कुम्भ में स्वबोध मंत्र द्रष्टा प्रज्ञा पुरुष गुरुदेव आनन्द प्रभु ने पूर्णाहुति के दौरान अपने सम्बोधन में भक्तजनों को सम्बोधित करते हुए कहा। 10 दिनों तक प्रज्ञा पुरुष आनन्द प्रभु ने अपने साधकों ,शिष्यों को विश्व धर्म जागरण के आध्यात्मिक अनुष्ठान में अतत्व वेद का तत्व, विश्व धर्म जागरण का आधात्मिक अनुष्ठान,अथर्वेद-पदार्थ विज्ञान व एटीएम विज्ञान का समग्र सन्देश, ज्ञान की सात भूमिकाये, प्रविद्या-मानव का एकमेव समाधान, ध्यानव निदिध्यासन पर कथा के दौरान बृहद जानकारी दी।

 आज स्वबोध आश्रम परिसर में बने 111 विशाल हवन कुंडों में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 11 देशों के संत साधकों ,शिष्यों स्थानीय भक्तजनों ने अपने सभी बुराई एवम अंधकार का स्वाहा बोलकर पूर्णाहुति में आहुति दी। 

     श्री आनन्द प्रभु ने अपने प्रबंधक व शिष्या आचार्य सरोजिनी माँ को महाआचार्य की उपाधि से महिमामण्डित किया जिसपर सन्तजनों समेत भक्तों ने सम्मान सहित उद्घोष कर समान्नित किया।

     स्थितप्रज्ञ स्मृति महोत्सव में प्रथम दिन पूर्णिमा महोत्सव, द्वितीय दिन उद्घाटन प्रबोधन और शेष दिवस समाधि दर्शन यात्रा, वेद प्रबोध एवम सत्संग, दीक्षांत समारोह ,पूर्णाहुति संत सहभोज (भंडारा) का सफल आयोजन सम्पन्न हुआ। 

 विश्व धर्म संस्थापना के लक्ष्य की सिद्धि के लिए समर्पित इस अमृत कुम्भ में सवा लाख दीपों से अखंड"श्री गुरु ज्योति"की अर्चना के पावन संकल्प में प्रतिदिन ग्यारह हजार दीपों से ज्योतिरारचन किया जो ज्ञान, भक्ति और कर्म की त्रिवेणी में स्नानकर जीवन को धन्य किया।

  इस महोत्सव में काशी के प्रबुद्धजनों ,सन्तो सहित सभी क्षेत्रों के लोगो ने प्रतिभाग कर धन्य हुए। प्रति बारहवें वर्ष 'स्वबोध कुम्भ' का आयोजन किया जाता है जो काशी की धरती को काशी विश्वनाथ जी के चरणों मे संत जन धन्य हुए।

 

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